Saturday, 31 January 2015

Baat karni mujhe mushkil kabhi aisi to na thi/ बात करनी मुझे मुश्किल कभी ऐसी तो न थी

बात करनी मुझे मुश्किल कभी ऐसी तो न थी
जैसी अब है तेरी महफ़िल कभी ऐसी तो न थी

ले गया छीन के कौन आज तेरा सब्र-ओ-क़रार
बेक़रारी तुझे ऐ दिल कभी ऐसी तो न थी

उस की आँखों ने ख़ुदा जाने किया क्या जादू
के तबीयत मेरी माइल कभी ऐसी तो न थी

(माइल = आकर्षित, आसक्त)

चश्म-ए-क़ातिल मेरी दुश्मन थी हमेशा लेकिन
जैसे अब हो गई क़ातिल कभी ऐसी तो न थी

(चश्म-ए-क़ातिल = क़ातिल की आँख, यहाँ तात्पर्य प्रेमिका की आँखों से है)

-बहादुर शाह ज़फ़र

पूरी ग़ज़ल यहाँ पढ़ें : बज़्म-ए-अदब




Baat karni mujhe mushkil kabhi aisi to na thi
Jaisi ab hai teri mahfil kabhi aisi to na thi

Le gaya chheen ke kaun aaj tera sabr-o-qaraar
Beqaraari tujhe ae dil kabhi aisi to na thi

Uski aankhon ne khuda jaane kiya kya jaadoo
Ke tabiyat meri maayil kabhi aisi to na thi

Chasm-e-qaatil meri dushman thi hamesha lekin
Jaisi ab ho gayi qaatil kabhi aisi to na thi

-Bahadur Shah Zafar

Tera Bayaan Ghalib vol 2/ तेरा बयान ग़ालिब


Tera Bayaan Ghalib vol 1/ तेरा बयान ग़ालिब

Tumse milkar tumhe bhulaana mushkil hai aasaaan nahin/ तुमसे मिलकर तुम्हें भुलाना मुश्किल है आसान नहीं

तुमसे मिलकर तुम्हें भुलाना मुश्किल है आसान नहीं
दीवाने दिल को समझाना, मुश्किल है आसान नहीं

हर रस्ता, हर मंज़र अब तो कोई फ़साना लगता है
जबसे तुम आए हो सारा शहर सुहाना लगता है
जाते लम्हों का ठहराना मुश्किल है आसान नहीं

झुकती आँखें, रुकती साँसें, दर्द अधूरा कहती हैं
दिल की पूरी बातें अक्सर दिल के अंदर रहती हैं
मुँह की बात ज़ुबाँ पर लाना मुश्किल है आसान नहीं

जो हम चाहें वो तुम चाहो फिर भी क्यों ये दूरी है
मिलकर भी हम मिल नहीं पाते ये कैसी मजबूरी है
रस्मों की दीवार गिराना मुश्किल है आसान नहीं


-निदा फ़ाज़ली

Singer: Lata Mangeshkar



Tumse milkar tumhe bhulaana mushkil hai aasaaan nahin
Deewane dil ko samjhana mushkil hai aasaan nahin

Har rasta har manzar ab to koi fasanaa lagta hai
Jab se tum aaye ho saara shehar suhanaa lagta hai
Jaate lamhon ko thehraana mushkil hai aasaan nahin

Jhukti aankhein rukti saansen dard adhuraa kehti hain
Dil ki poori baatein aksar dil ke andar rehti hain
Dil ki baat zubaan par laana mushkil hai aasaan nahin

Jo hum chahen wo tum chaho phir bhi kyon ye doorie hai
Milkar bhi hum mil nahin paate ye kaisi majboori hai
Rasmon ki deewaar giranaa mushkil hai aasaan nahin

-Nida Fazli

Muddaten beet gayin tum nahin aaye ab tak/ मुद्दतें बीत गयीं तुम नहीं आये अब तक

मुद्दतें बीत गयीं तुम नहीं आये अब तक
रास्ता और दिखाओगे न जाने कब तक
जो भी मिलता है वो तुमसा ही नज़र आता है

दिल की तन्हाइयाँ बहलाती हैं यूँ भी ग़म को
जैसे सचमुच ही पुकारा हो तुम्हीं ने हमको
पास आते ही मगर ख़्वाब  बिखर जाता है

वो हसीं लम्हे जो कल तक थे मुरादों की तरह
आज पलकों पे चमक उठाते हैं यादों की तरह
दर्द रह जाता है और वक़्त गुज़र जाता है

भेजते हो कभी गुल को तो कभी शबनम को
तुम कहाँ कैसे हो मालूम है हर मौसम को
चाँद हर शब् को तुम्हारी ही ख़बर लाता है

-निदा फ़ाज़ली

                                                               Singer: Asha Bhonsle



Muddaten beet gayin tum nahin aaye ab tak
Raastaa aur dikhaao ge na jaane kab tak
Jo bhi miltaa hai wo tum saa hi nazar aataa hai

Dil ki tanhaaiyaaN behalaati hain yooN bhi Gham ko
Jaise sach much hi pukaaraa ho tumhin ne hamko
Paas aate hi magar Khwaab bikhar jaataa hai

Wo haseen lamhe jo kal tak the muraadon ki tarah
Aaj palkon pe chamak uThate hain yaadon ki tarah
Dard reh jaataa hai aur waqt guzar jaataa hai

Bhejte ho kabhi gul ko to kabhi shabnam ko
Tum kahaaN kaise ho maaloom hai har mausam ko
Chaand har shab ko tumhaari hi khabar laataa hai

-Nida Fazli

Jaane kya haal ho is dil ka agar tu aaye/ जाने क्या हाल हो इस दिल का अगर तू आए

जाने क्या हाल हो इस दिल का अगर तू आए
न तो जज़्बात पे न ख़ुद पे ही क़ाबू आए

चार जानिब तेरी परछाई नज़र आती है
तू ही ख़ुशबू सा महकता हुआ हरसू आए

(जानिब = ओर, तरफ़), (हरसू = हर तरफ़)

तेरे जलवों की निगाहों को नहीं ताब रही
ऐसा महसूस हुआ चाँद को हम छू आए

(ताब = सहनशक्ति, शक्ति, सामर्थ्य)

तेरी दिलदार निगाहों का दिलासा पाकर
मेरी पलकों पे चमकते हुए जुगनू आए

-नामालूम

Singer: Asha Bhonsle



Jaane kya haal ho is dil ka agar tu aaye
Na to jazbaat pe, na khud pe hi qaaboo aaye

Chaar jaanib teri, parchhayi nazar aati hai
Tu hi khushboo sa mehakta hua harsoo aaye

Tere jalwe ki nigahon ko nahi taab rahi
Aisa mahsoos hua chaand ko hum chhoo aaye

Teri dildaar nigahon ka dilaasa paakar
Meri palkon pe, chamakte hue jugnoo aaye

-Unknown

Saari duniya ka jo maseeha hai/ सारी दुनिया का जो मसीहा है

सारी दुनिया का जो मसीहा है
अपने ही घर में वो अकेला है

रेत के घर में काँच के रिश्ते
ज़िन्दगी भी अजब तमाशा है

अब कहीं कुछ नज़र नहीं आता
दूर तक ये धुआँ धुआँ क्या है

ज़िन्दगी रास्ता है काँटों का
हो के जिसपे हमें गुज़रना है

मोम के जिस्म धूप की चादर
ऐसा मंज़र भी हमने देखा है

ये मुकद्दर का खेल है सारा
इक भिखारी है एक दाता है

-राजेश जौहरी


Movie : Apne Begaane



Saari duniya ka jo maseeha hai
Apne hi ghar mein wo akela hai

Ret ke ghar khaanch ke rishte
Zindagi bhi ajab tamaasha hai

Ab kahin kuch nazar nahi aata
Door tak ye dhuaan dhuaan kya hai

Zindagi raasta hai kaanton ka
Ho ke jis pe hamen guzarnaa hai

Mom ke jism dhoop ki chaadar
Aisa manzar bhi humne dekha hai

Ye mukaddar ka khel hai saara
Ik bhikhaari hai ek daata hai

-Rajesh Johari

Zara back ke mod


Zindagi mein me sadaa muskuraate raho/ ज़िन्दगी में सदा मुस्कुराते रहो

ज़िन्दगी में सदा मुस्कुराते रहो
फ़ासले कम करो दिल मिलाते रहो

दर्द कैसा भी हो आँख नम ना करो
रात काली सही कोई ग़म ना करो
इक सितारा बनो जगमगाते रहो

बाँटना है अगर बाँट लो हर खुशी
ग़म ना ज़ाहिर करो तुम किसी पे कभी
दिल की गहराई में ग़म छुपाते रहो

अश्क अनमोल हैं खो ना देना कहीं
इनकी हर बूँद है मोतियों से हसीं
इनको हर आँख से तुम चुराते रहो

-नक़्श लायलपुरी


Movie: Raahi 

Zindagi mein sadaa muskuraate raho
Faasle kam karo dil milaate raho

Dard kaisa bhi ho aankh num na karo
Raat kaali sahi koi gham na karo
Ik sitaara bano jagmagaate raho

Baantna hai agar baant lo har khushi
Gham na zaahir karo tum kisi pe kabhi
Dil ki gahraai mein gham chupaate raho

Ashk anmol hain kho na denaa kahin
Inki har boond hai motiyon se haseen
Inko har aankh se tum churaate raho

-Naqsh Lyallpuri

Dil se ehsaas ki daulat ko laga kar rakhna/ दिल से एहसास की दौलत को लगा कर रखना

दिल से एहसास की दौलत को लगा कर रखना
इस कड़ी धूप में इक छाँव बचा कर रखना

वक़्त बेवक़्त सहारा तो यही देती हैं
उसकी यादों से बहरहाल बना कर रखना

क्या पता लौट के वापस वो चला ही आए
उसकी हर चीज़ सलीक़े से सजा कर रखना

आसमानों की तरफ हाथ बढ़ाने वाले
अपनी मिट्टी से भी पहचान बना कर रखना

आदमी कम हैं यहाँ और ख़ुदा हैं ज़्यादा
मेरी मानो तो ज़रा सर को झुका कर रखना

कोई उम्मीद न हो साथ तो जीना क्या है
कोई सपना तो इन आँखों में जगाकर रखना

-नामालूम




Dil se ehsaas ki daulat ko laga kar rakhna
Is kadi dhoop mein ik chhaon bacha kar rakhna

Waqt bewaqt sahaara to yahi deti hain
Uski yaadon se baharhaal banaa kar rakhna

Kya pata laut ke wapas wo chalaa hi aaye
Us ki har cheez saleeqe se saja kar rakhna.

Aasmano ki taraf haath badhaane waale
Apni mitti se bhi pehchan bana kar rakhna

Aadmi kam hain yahan aur khuda hain zyada
Meri maano to zara sar ko jhuka kar rakhna

Koi ummeed na ho saath to jeena kya hai
Koi sapna to in aankhon mein jagaakar rakhna

 -Unknown

Ae kaash wo kisi din\ ऐ काश वो किसी दिन तन्हाईयों में आयें

ऐ काश वो किसी दिन तन्हाईयों में आयें
उनको ये राज़-ए-दिल हम महफ़िल में क्या बतायें

लगता है ड़र उन्हें तो हमराज़ ले के आयें
जो पूछना है पूछें कहना है जो सुनायें
तौबा हमारी हमदम उन्हें हाथ भी लगायें
ऐ काश वो किसी दिन तन्हाईयों में आयें

उन्हें इश्क़ गर न होता पलकें नहीं झुकाते
गालों पे शोख़ बादल जुल्फ़ों के ना गिराते
करदे न क़त्ल हमको मासूम ये अदायें
ऐ काश वो किसी दिन तन्हाईयों में आयें

Movie: Hum Hain Pyaar Mein


Neele neele aasmaan mein tu hai/ नीले नीले आसमाँ में तू है

नीले नीले आसमाँ में तू है
नाज़ुक सी कलियों में तू है
धरती की हलचल में तू है
जीवन के हर पल में तू है
हे ईश्वर तू जाने यहाँ क्या है किसका शिख़र

तू है मन की शक्ति, आशा है सबकी, तू ही सबका साथी रे

सूरज की गर्मी में तू है
हवाओं की नर्मी में तू है
बहते हुए झरनों में तू है
पंछी की उड़ानों में तू है
आ सब ढूँढते हैं यहाँ अपना अपना शिख़र
हे ईश्वर तू जाने यहाँ क्या है किसका शिख़र

तू है मन की शक्ति, आशा है सबकी, तू ही सबका साथी रे

मानव की हर सांस तू है
पल पल की इक आस तू है
सब दूर हैं पास तू है
जग धूप हैं छाँव तू है
हम पहचाने कैसे निराकार तेरा शिख़र
हे ईश्वर तू जाने यहाँ क्या है किसका शिख़र

Movie: Shikhar

Gudia tujh par ik pal hansna ik pal rona aaye/ गुड़िया तुझ पर इक पल हँसना, इक पल रोना आए

गुड़िया तुझ पर इक पल हँसना, इक पल रोना आए
वक़्त बना वो बच्चा जिसके, हाथ खिलौना आए

ऐसी चली हालात की आँधी बुझ गई मन की ज्योति
अरमानो की ड़ोर यों टूटी बिखर गए सब मोती
तेरे अश्कों को माला में किसे पिरोना आए

तेरा कोई ज़ोर चले ना इस दुनिया के आगे
तुझ पर अपना हुक़ुम चलायें रस्म-ओ-रिवाज़ के धागे
तेरी मजबूरी को ग़म का बोझ ही ढोना आए

सबने शोर मचा कर कह दी अपनी अपनी बात
बैठी रही ख़ामोश ये गुड़िया दिल पर रख कर हाथ
पार लगाना कोई ना जाने सबको डुबोना आए

काश कभी कानून की देवी आँख से पट्टी खोले
देख के सब इंसाफ़ करे वो सच को बराबर तोले
रस्मो के संग जज़्बों को भी उसे समोना आए

-मदन पाल

Movie: Kahaani Gudia Ki



Har ek faisla har imtihaan chhood diya/ हर एक फ़ैसला हर इम्तिहान छोड़ दिया

हर एक फ़ैसला हर इम्तिहान छोड़ दिया
न चाहते हुए भी ये जहान छोड़ दिया

जब इसमें सांस भी लेना मुहाल होने लगा
तो हमने जिस्म का आख़िर मकान छोड़ दिया

ज़मीं को घेर लिया ग़म ने तो कहाँ जाते
ख़ुदा का शुक्र है जो आसमान छोड़ दिया

बनी जो भूल-भुलइया हमारी राहगुज़र
सफ़र हयात का फिर दरमियान छोड़ दिया

(हयात = जीवन), (दरमियान = बीच, मध्य)

-मदन पाल

Movie: Kahaani Gudia Ki

Dard apna likh na paaye/ दर्द अपना लिख ना पाए, ऊँगलियाँ जलती रहीं

दर्द अपना लिख ना पाए, ऊँगलियाँ जलती रहीं
रस्मों के पहरे में दिल की, चिट्ठियाँ जलती रहीं

ज़िन्दगी की महफ़िलें सजती रही हर पल मगर
मेरे कमरे में मेरी तन्हाईयाँ जलती रहीं

बारिशों के दिन गुज़ारे गर्मियाँ भी कट गईं
पूछ मत हमसे के कैसे सर्दियाँ जलती रहीं

तुम तो बादल थे हमें तुमसे बड़ी उम्मीद थी
उड़ गये बिन बरसे तुम भी बस्तियाँ जलती रहीं

-मदन पाल

Movie: Kahaani Gudia Ki





Hey jag trata/ हे जग त्राता विश्व विधाता

हे जग त्राता विश्व विधाता
हे सुख शान्ति निकेतन है

प्रेम के सिन्धु दीन के बन्धो
दुख दरिद्र विनाशन है

नित्य अखण्ड़ अनंत अनादि
पूरण ब्रह्म सनातन है

जग आश्रय जगपति जगबंदन
अनुपम अलख निरंजन है

प्राण सखा त्रिभुवन प्रतिपालक
जीवन के अवलम्बन है

Movie: Viruddh


Shaam-e-firaaq ab naa poochh, aayi aur aa ke tal gayi/ शाम-ए-फ़िराक़ अब न पूछ आई और आके टल गई

शाम-ए-फ़िराक़ अब न पूछ आई और आके टल गई
दिल था के फिर बहल गया, जाँ थी के फिर सम्भल गई

(फ़िराक़ - वियोग, विरह, जुदाई),  (शाम-ए-फ़िराक़ = वियोग की शाम)

बज़्म-ए-ख़्याल में तेरे हुस्न की शमा जल गई
दर्द का चाँद बुझ गया, हिज्र की रात ढल गई

[(बज़्म-ए-ख़्याल = कल्पना की महफ़िल), (हिज्र = बिछोहजुदाई)]

जब तुझे याद कर लिया, सुबह महक महक उठी
जब तेरा ग़म जगा लिया, रात मचल मचल गई

दिल से तो हर मुआमला करके चले थे साफ़ हम
कहने में उनके सामने बात बदल बदल गई

आख़िर-ए-शब के हमसफ़र 'फ़ैज़' न जाने क्या हुए
रह गई किस जगह सबा, सुबह किधर निकल गई

(आख़िर-ए-शब = रात का अंत), (सबा = मंद हवा)

-फैज़ अहमद फैज़



Shaam-e-firaaq ab naa poochh, aayi aur aa ke tal gayi
Dil thaa ki phir bahal gayaa, jaan thi ki phir sambhal gayi

Bazm-e-khayaal mein tere husn ki shamaa jal gayi
Dard kaa chaand bujh gayaa hizr ki raat dhal gayi

Jab tujhe yaad kar liyaa subah mahak mahak uthi
Jab teraa gham jagaa liyaa raat machal machal gayi

Dil se to har muaamlaa kar ke chale the saaf hum
Kahne mein un ke saamne baat badal badal gayii

Aakhir-e-shab ke humsafar 'Faiz' na jaane kya huye
Reh gayi kis jagah sabaa, subah kidhar nikal gayi

-Faiz Ahmed Faiz

Gulon mein rang bhare baad-e-nau-bahaar chale/ गुलों में रंग भरे, बाद-ए-नौ-बहार चले

गुलों में रंग भरे, बाद-ए-नौ-बहार चले
चले भी आओ के गुलशन का कारोबार चले

(गुल = फूल, गुलाब), (बाद-ए-नौ-बहार = नई बहार की हवा), (गुलशन = बग़ीचा)

क़फ़स उदास है यारों, सबा से कुछ तो कहो
कहीं तो बहर-ए-ख़ुदा आज ज़िक्र-ए-यार चले

(क़फ़स = पिंजरा), (सबा = मंद हवा), (बहर-ए-ख़ुदा = ख़ुदा के लिए)

बड़ा है दर्द का रिश्ता, ये दिल ग़रीब सही
तुम्हारे नाम पे आयेंगे ग़मगुसार चले

(ग़मगुसार = हमदर्द, दुःख बंटानेवाला)

जो हमपे गुज़री सो गुज़री मगर शब-ए-हिज्राँ
हमारे अश्क तेरी आक़बत सँवार चले

(शब-ए-हिज्राँ = जुदाई की रात), (अश्क = आँसू),  (आक़बत = परलोक, भविष्य)

मक़ाम 'फैज़' कोई राह में जँचा ही नहीं
जो कू-ए-यार से निकले तो सू-ए-दार चले

(मक़ाम = पड़ाव), (कू-ए-यार = प्रेमिका की गली), (सू-ए-दार = फाँसी के फंदे की ओर)

-फैज़ अहमद फैज़


इसी ग़ज़ल के कुछ और अश'आर:

कभी तो सुबह तेरे कुंज-ए-लब से हो आग़ाज़
कभी तो शब सर-ए-काकुल से मुश्कबार चले

(कुंज-ए-लब = होंठ का कोना), (आग़ाज़ = प्रारम्भ), (शब = रात), (सर-ए-काकुल = बालों के लटों से), (मुश्कबार = कस्तूरी की ख़ुशबू, बहुत ख़ुशबूदार)

हुज़ूर-ए-यार हुई दफ़्तर-ए-जुनूँ की तलब
गिरह में ले के गिरेबाँ का तार तार चले

(हुज़ूर-ए-यार = प्रेमिका के सामने), (दफ़्तर-ए-जुनूँ = उन्माद का सविस्तार वृतांत), (तलब = बुलावा, माँग), (गिरह = गाँठ), (गिरेबाँ = कुर्ते/ कमीज़ का गला)






Gulon mein rang bhare baad-e-nau-bahaar chale
Chale bhi aao ke gulshan ka kaarobar chale

Kafas udaas hai yaaron saba se kuch to kaho
Kaheen to bahar-e-khuda aaj zikr-e-yaar chale

Bada hai dard ka rishta ye dil gareeb sahi
Tumhare naam pe aayenge gham-gusaar chale

Jo humpe guzri so guzri magar shab-e-hizraan
Hamare ashk teri aakbat sanwaar chale

Makaam 'Faiz' koi raah mein janchaa hi nahi
Jo koo-e-yaar se nikle to soo-e-daar chale

-Faiz Ahmed Faiz

Thursday, 29 January 2015

Ye berukhi na dikhao ke raat jaati hai/ ये बेरूख़ी न दिखाओ के रात जाती है

ये बेरूख़ी न दिखाओ के रात जाती है
नक़ाब रुख़ से उठाओ के रात जाती है

शब-ए-विसाल भी ऐ दोस्त ख़ामोशी क्यूँ है
कोई तो बात सुनाओ के रात जाती है

(शब-ए-विसाल = मिलन की रात)

जो मैकदे में नहीं मय तो क्या हुआ साक़ी
सुबू ही धो के पिलाओ के रात जाती है

(सुबू = शराब रखने का पात्र, मटका, घड़ा)

वो एक शब के लिए मेरे घर में आए हैं
सितारे तोड़ के लाओ के रात जाती है

(शब = रात)

-सुदर्शन फ़ाकिर





Live in Kenya





इसी ग़ज़ल के कुछ और अश'आर:

तुम आये हो मैं ये कहता हूँ तुम नहीं आये
मुझे यकीन दिलाओ के रात जाती है

चराग-ए-दिल के उजाले  को तुम सहर न कहो
बहाने यूँ न बनाओ के रात जाती है

(सहर = सुबह)

तमाम उम्र पड़ी है शिकायतों के लिए
तुम आज दिल न दुखाओ के रात जाती है


Ye berukhi na dikhao ke raat jaati hai
Naqaab rukh se uthaao ke raat jaati hai

Shab-e-wisaal bhi ae dost khamoshi kyon hai
Koi to baat sunao ke raat jaati hai

Jo maikade mein nahi mai to kya hua saaqi
Suboo hi dho ke pilaao ke raat jaati hai

Wo ek shab ke liye mere ghar mein aaye hain
Sitaare tod ke laao ke raat jaati hai

-Sudarshan Faakir

Ae kaash meri aah mein itna asar to ho/ ऐ काश मेरी आह में इतना असर तो हो

ऐ काश मेरी आह में इतना असर तो हो
मेरा ख़याल उसको मुझे देख कर तो हो

पहली नज़र में वो मुझे आशिक़ समझ गए
पहचान ले निगाह को इतनी नज़र तो हो

ये क्या के आज कुछ है कल कुछ ज़बान पर
शिकवा हो या हो शुक्र मगर उम्र भर तो हो

ये क्या के दुश्मनी में भी होने लगी कमी
मिलता रहे वो रंज के जिसमे गुज़र तो हो

(रंज = कष्ट, दुःख, आघात, पीड़ा)

आते ही आते आएगा फ़रियाद में असर
जल्दी पड़ी है क्या अभी टुकड़े जिगर तो हो

-नामालूम

https://www.youtube.com/watch?v=_-5TxLlzkwA&feature=youtu.be

Ae kaash meri aah mein itna asar to ho
Mera khayaal usko mujhe dekh kar to ho

Pahli nazar mein wo mujhe aashiq samajh gaye
Pahchaan le nigaah ko itni nazar to ho

Ye kya ke aaj kuch hai to kal kuch zubaan par
Shikwa ho ya shukr magar umr bhar to ho

Ye kya ke dushmani mein bhi hone lagi kami
Milta rahe wo ranj ke jis mein guzar to ho

Aate hi aate aayega fariyaad mein asar
Jaldi padi hai kya abhi tukde jigar to ho

-Unknown

Main nazar se pee raha hoon ye samaa badal na jaaye/ मै नज़र से पी रहा हूँ ये समा बदल न जाए

मै नज़र से पी रहा हूँ ये समा बदल न जाए
न झुकाओ तुम निगाहें कहीं रात ढल न जाए

न नक़ाब उठा साक़ी अभी रात कुछ है बाक़ी
तेरा रिंद गिरते गिरते कहीं फिर संभल न जाए

(रिंद = शराबी)

मेरे अश्क भी हैं इसमें ये शराब उबल न जाए
मेरा जाम छूने वाले तेरा हाथ जल न जाए

(अश्क = आँसू)

मेरी ज़िन्दगी के मालिक मेरे दिल पे हाथ रख दे
तेरे आने की ख़ुशी में मेरा दम निकल न जाए

मुझे फूँकने से पहले मेरा दिल निकाल लेना
ये किसी की है अमानत मेरे साथ जल न जाए

-अनवर मिर्ज़ापुरी





Main nazar se pee raha hoon ye samaa badal na jaaye
Na jhukaao tum nigaahein kahin raat dhal naa jaaye

Na naqaab utha saaqi abhi raat kuch hai baaki
Tera rind girte girte kahin phir sambhal na jaaye

Mere ashk bhi hain is mein ye sharab ubal na jaaye
Mera jaam chhoone wale tera haath jal naa jaaye

Meri zindagi ke maalik mere dil pe haath rakh de
Tere aane ki khushi mein mera dam nikal naa jaaye

-Anwar Mirzapuri

Aaye kuch abr kuch sharaab aaye/ आए कुछ अब्र कुछ शराब आये

आए कुछ अब्र कुछ शराब आये
उसके बाद आए जो अज़ाब आये

(अब्र = बादल), (अज़ाब = दुख, कष्ट, संकट)

बाम-ए-मीना से माहताब उतरे
दस्त-ए-साक़ी में आफ़ताब आये

(बाम = छत), (मीना = शराब रखने के पात्र), (माहताब = चन्द्रमा), (दस्त-ए-साक़ी = साक़ी का हाथ), (आफ़ताब = सूरज)

कर रहा था ग़म-ए-जहाँ का हिसाब
आज तुम याद बेहिसाब आये

(ग़म-ए-जहाँ = दुनिया के दुःख)

ना गई तेरे ग़म की सरदारी
दिल में रोज़ यूँ इंक़लाब आये

(सरदारी = अध्यक्षता, स्वामित्व)

इस तरह अपनी ख़ामोशी गूंजी
गोया हर सिम्त से ज़वाब आये

(गोया = मानो, जैसे), (सिम्त = दिशा, ओर)

'फ़ैज़' थी राह सर-ब-सर मंज़िल
हम जहाँ पहुँचे कामयाब आए

(सर-ब-सर = बिलकुल, सरासर)

-फैज़ अहमद फैज़


इसी ग़ज़ल के कुछ और अश'आर:


हर रग-ए-ख़ूँ में फिर चराग़ाँ हो

सामने फिर वो बेनक़ाब आए

उम्र के हर वरक़ पे दिल को नज़र
तेरी मेहर-ओ-वफ़ा के बाब आए

(वरक़ = किताब के पन्ने, पृष्ठ), (मेहर–ओ–वफ़ा = प्यार और वफ़ा), (बाब = किताब का अध्याय, परिच्छेद)

जल उठे बज़्म-ए-ग़ैर के दर-ओ-बाम
जब भी हम ख़ानाख़राब आए

(बज़्म-ए-ग़ैर = ग़ैर की महफ़िल), (दर-ओ-बाम = दरवाज़े और छत), (ख़ानाख़राब  = अभागा, बदनसीब)


Aaye kuch abr kuch sharaab aaye
Uske baad aaye jo azaab aaye

Baam-e-meena se maahtaab utre
Dast-e-saaqi mein aftaab aaye

Kar raha tha gham-e-jahaan ka hisaab
Aaj tum yaad be-hisaab aaye

Na gayi tere gham ki sardaari
Dil mein roz yoon inqalaab aaye

Is tarah apni khaamoshi goonji
Goya har simt se jawaab aaye

'Faiz' thi raah sar-ba-sar manzil
Hum jahaan pohuche kaamyaab aaye

-Faiz Ahmed Faiz

Humko to gardish-e-haalat pe rona aaya/ हम को तो गर्दिश-ए-हालात पे रोना आया

हम को तो गर्दिश-ए-हालात पे रोना आया
रोने वाले तुझे किस बात पे रोना आया

कितने बेताब थे रिमझिम में पिएँगे लेकिन
आई बरसात तो बरसात पे रोना आया

कौन रोता है किसी और के ग़म की ख़ातिर
सबको अपनी ही किसी बात पे रोना आया

-सैफ़ुद्दीन सैफ़


इसी ग़ज़ल के कुछ और अश'आर:

कैसे जीते हैं ये किस तरह जिए जाते हैं
अहल-ए-दिल की बसर औक़ात पे रोना आया

(अहल-ए-दिल = दिल वाले)

जी नहीं आप से क्या मुझ को शिकायत होगी
हाँ मुझे तल्ख़ी-ए-हालात पे रोना आया

हुस्न-ए-मग़रूर का ये रंग भी देखा आख़िर
आख़िर उन को भी किसी बात पे रोना आया

कैस मर मर के गुज़ारी है तुम्हें क्या मालूम
रात भर तारों भरी रात पे रोना आया

हुस्न ने अपनी ज़फाओं पे बहाए आँसू
इश्क़ को अपनी शिकायत पे रोना आया

कितने अंजान है क्या सादगी से पूछते हैं
कहिए क्या मेरी किसी बात पे रोना आया

अव्वल अव्वल तो बस एक आह निकल जाती थी
आख़िर आख़िर तो मुलाक़ात पे रोना आया

'सैफ़' ये दिन तो क़यामत की तरह गुज़रा है
जाने क्या बात थी हर बात पे रोना आया



Hum ko to gardish-e-haalat pe rona aaya
Rone wale tujhe kis baat pe rona aaya

Kitne betaab the rimjhim mein piyenge lekin
Aayi barsaat to barsaat pe rona aaya

Kaun rota hai kisi aur ke gham ki khaatir
Sabko apni hi kisi baat pe rona aaya

-Saifuddin Saif

Ye kaisi aazaadi hai/ ये कैसी आज़ादी है

ये कैसी आज़ादी है
चंद घराने छोड़ के भूखी नंगी हर आबादी है

जितना देश तुम्हारा है ये उतना देश हमारा है
दलित महिला आदिवासी सबने इसे सँवारा है
ऐसा क्यों है कहीं ख़ुशी है और कहीं बर्बादी है
ये कैसी आज़ादी है

अंधियारों से बाहर निकलो अपनी शक्ति जानो तुम
दया धरम की भीख न मांगो हक़ अपना पहचानो तुम
अन्याय के आगे जो झुक जाए वो अपराधी है
ये कैसी आज़ादी है

जिन हाथों में काम नहीं है उन हाथों को काम भी दो
मजदूरी करने वालों को मजदूरी के दाम भी दो
बूढ़े होते हाथ पाँव को जीने का आराम भी दो
दौलत के हर बटवारे में मेहनतकश का नाम भी दो
झूठों के दरबार में अब तक सच्चाई फ़रियादी है
ये कैसी आज़ादी है

-निदा फ़ाज़ली




Deewar-o-dar pe naksh banaane ka hai junoon/ दीवार-ओ-दर पे नक़्श बनाने का है जुनून

दीवार-ओ-दर पे नक़्श बनाने का है जुनून
ख़ुद तुझको आज तुझसे चुराने का है जुनून

दुनिया के भीड़ से हट जाने का है जुनून
हर आग में यह जिस्म तपाने का है जुनून

मौत और ज़िन्दगी तो बस मिलती है एक बार
दोनों को शान से ही निभाने का है जुनून

कल तक जो ज़िन्दगी थी बनी आज इक अज़ाब
अब इस अज़ाब में भी सिमट जाने का है जुनून

(अज़ाब = दुख, कष्ट, संकट)

देखो न रूठ जाए कहीं वक़्त हमनशीं
मुट्ठी में वक़्त को भी छुपाने का है जुनून

चलता रहेगा वक़्त का पहिया ऐ जानेमन
दाँव पे अपनी जान लगाने का है जुनून

-नामालूम

Movie: Abhishek


Deewar-o-dar pe naksh banaane ka hai junoon
Khud tujhko aaj tujhse churaane ka hai junoon

Duniya ki bheed se hat jaane ka hai junoon
Har aag mein ye jism tapaane ka hai junoon

Maut aur zindagi to bas milti hai ek baar
Dono ko shaan se hi nibhaane ka hai junoon

Kal tak jo zindagi thi bani aaj ik azaab
Ab is azaab mein bhi simat jaane ka hai junoon

Dekho na rooth jaye kahin waqt humnashin
Mutthi mein waqt ko bhi chupaane ka hai junoon

Chalta rahega waqt ka pahiaa ae jaaneman
Daanv pe apni jaan lagaane ka hai junoon

-Unknown

Chaahi thi dil ne tujhse wafaa kam bahut hi kam/ चाही थी दिल ने तुझसे वफ़ा कम बहुत ही कम

चाही थी दिल ने तुझसे वफ़ा कम बहुत ही कम
शायद इसी लिए है गिला कम बहुत ही कम

हाँ कट चली है उम्र-ए-गुरेज़ाँ तेरे बगैर
इतना बड़ा गुनाह है सज़ा कम बहुत ही कम

(उम्र-ए-गुरेज़ाँ = भागती हुई उम्र)

जलते सुना चराग से दामन हज़ार बार
दामन से कब चराग जला कम बहुत ही कम

आ जाइए के आप से पहले ना आए मौत
अब वक़्त रह गया है बहुत कम बहुत ही कम

सदियों से यूँ तो है यहाँ इंसान का वजूद
इंसान हमको कब है मिला कम बहुत ही कम

-महबूब ख़िज़ां

इसी ग़ज़ल के कुछ और अश'आर:

थे दूसरे भी तेरी मोहब्बत के आस-पास
दिल को मगर सुकून मिला, कम बहुत ही कम

अब रूह काँपती है, अजल है क़रीब-तर
ऐ हम-नसीब ,नाज़-ओ-अदा कम बहुत ही कम

(अजल = मृत्यु)

क्या हुस्न था कि आँख लगी साया हो गया
वो सादगी की मार, हया कम बहुत ही कम

चाही थी दिल ने तुझसे वफ़ा, कम बहुत ही कम
शायद इसीलिये है गिला, कम बहुत ही कम

यूँ मत कहो 'ख़िज़ाँ' कि बहुत देर हो गई
हैं आज-कल वो तुम से ख़फ़ा कम बहुत ही कम


https://www.youtube.com/watch?v=ruBOJZkHvMA&feature=youtu.be







Chaahi thi dil ne tujhse wafaa kam bahut hi kam
Shayad isi liye hai gila kam bahut hi kam

Haan kat chali hai umr-e-gurejaan tere bagair
Itna bada gunaah hai saza kam bahut hi kam

Jalte suna chaarag se daaman hazaar baar
Daaman se kab chaarag jalaa kam bahut hi kam

Aa jayiye ke aap se pehle na aaye maut
Ab waqt reh gaya hai bahut kam bahut hi kam

Sadiyon se yoon to hai yahaan insaan ka wajood
Insaan humko kab hai mila kam bahut hi kam

-Mehboob Khizaan

Kyun na ho baam pe wo jalwanuma teesre din / क्यों न हो बाम पे वो जलवानुमा तीसरे दिन

क्यों न हो बाम पे वो जलवानुमा तीसरे दिन
चाँद भी छुपके निकलता है भला तीसरे दिन

(बाम = छत)

ग़र्क़-ए-दरिया-ए-मोहब्बत की नहीं मिलती लाश
वरना डूबा हुआ उभरे है सदा तीसरे दिन

(ग़र्क़-ए-दरिया-ए-मोहब्बत = प्यार के समुन्दर में डूबा हुआ)

तीन दिन चश्म के बीमार का कर अपने इलाज़
होती मालूम है तासीर-ए-दवा तीसरे दिन

उम्र यक हफ़्ता नहीं बाग़ में ऐ गुल मत भूल
रंग बदले है ज़माने की हवा तीसरे दिन

छोड़ मत जुल्फ़ के मारे को तू दरियाँ में अभी
साँप के काटे को देते हैं बहा तीसरे दिन

-नज़ीर अक़बराबादी



इसी ग़ज़ल के कुछ और अश'आर:

क्यूँ न हो बाम पे वो जल्वा-नुमा तीसरे दिन
माह भी छुप के निकलता है दिला तीसरे दिन

(माह = चाँद), (दिला = ऐ दिल!)

हाथ से अब तो क़लम रश्क-ए-मसीहा रख दे
नुस्ख़े बदले हैं जहाँ के हुकमा तीसरे दिन

दिल-ए-बीमार रहे इश्क़ में क्यूँ कर सरसब्ज़
ख़ाक़ से दाने को है नश्व-ओ-नुमां तीसरे दिन

(सरसब्ज़ हरा-भरा), (नश्व-ओ-नुमां = वृद्धि, विकास)

छोड़ मत ज़ुल्फ़ के मारे को तू दरिया में हनूज़
साँप के काटे को देते हैं बहा तीसरे दिन

(हनूज़ = अभी तक, इस समय)

अब ज़रा चश्म के बीमार का कर अपने इलाज
होती मालूम है तासीर-ए-दवा तीसरे दिन

लोग कहते हैं कि हैं फूल तिरे कुश्ते के
मेहँदी हाथों में तू क़ातिल लगा तीसरे दिन

चार हर्फ़ उस बुत-ए-पुर-ख़ूँ के उपर भेज 'नज़ीर'
आप से आप जो हो जाए ख़फ़ा तीसरे दिन




Kyun na ho baam pe wo jalwanuma teesre din
Chaand bhi chup ke niklata hai bhala teesre din

Garq-e-dariya-e-mohabbat ki nahi milti laash
Warna dooba hua ubhre hai sada teesre din

Teen din Chashm ke beemar ka kar apne ilaaz
Hoti maalum hai taaseer-e-dawaa teesre din

Umr yak hafta nahi baag mein ae gul mat bhool
Rang badle hai zamane ki hawa teesre din

Chhor mat zulf ke maare ko tu dariya mein abhi
Saamp ke kaate ko dete hain bahaa teesre din

-Nazeer Akbarabadi 

Kab yaad mein tera saath nahin, kab haath mein tera haath nahin/ कब याद में तेरा साथ नहीं कब हाथ में तेरा हाथ नहीं

कब याद में तेरा साथ नहीं कब हाथ में तेरा हाथ नहीं
सद शुक्र के अपनी रातों में अब हिज्र की कोई रात नहीं

(सद शुक्र = ईश्वर को बहुत बहुत धन्यवाद), (हिज्र = जुदाई, विरह)

मुश्किल हैं अगर हालात वहाँ, दिल बेच आएँ जाँ दे आएँ
दिल वालों कूचा-ए-जानाँ में क्या ऐसे भी हालात नहीं

(कूचा-ए-जानाँ = प्रेमिका की गली)

जिस धज से कोई मक़तल में गया वो शान सलामत रहती है
ये जान तो आनी जानी है, इस जाँ की तो कोई बात नहीं

(मक़तल = वधस्थल)

मैदान-ए-वफ़ा दरबार नहीं, याँ नाम-ओ-नसब की पूछ कहाँ
आशिक़ तो किसी का नाम नहीं, कुछ इ'श्क़ किसी की ज़ात नहीं

(नसब = कुल, वंश, खानदान, गोत्र)

गर बाज़ी इ'श्क़ की बाज़ी है, जो चाहो लगा दो डर कैसा
गर जीत गए तो क्या कहना, हारे भी तो बाज़ी मात नहीं

-फैज़ अहमद फैज़







Jagjit Singh sings Faiz on Faiz Birthday Celebration in 1978

https://youtu.be/OYZk8di07fE


Live in Kenya



Kab yaad mein tera saath nahin, kab haath mein tera haath nahin
Sad-shuqr ke apani raaton mein ab hizr ki koyi raat nahin

Mushkil hai agar haalaat wahaan, dil bech aayen, jaan de aayen
Dil waalon koocha-e-jaana mein kya aise bhi haalaat nahi

Jis dhaj se koyi maqatal mein gaya wo shaan salaamat rahati hai
Ye jaan to aani-jaani hai is jaan ki to koyi baat nahin

Maidaan-e-wafa darabaar nahin yaan naam-o-nasab ki poochh kahaan
Aashiq to kisi ka naam nahin kuchh ishq kisi ki zaat nahin

Gar baazi ishq ki baazi hai jo chaahe laga do dar kaisa
Gar jeet gaye to kya kahana haare bhi to baazi maat nahin

-Faiz Ahmed Faiz

Tum poocho aur main na bataun aise to halaat nahin/ तुम पूछो और मैं न बताऊं ऐसे तो हालात नहीं

तुम पूछो और मैं न बताऊं ऐसे तो हालात नहीं
एक ज़रा सा दिल टूटा है और तो कोई बात नहीं

टूट गया जब दिल तो फिर ये सांस का नग़मा क्या मानी
गूँज रही है क्यूँ शहनाई जब कोई बारात नहीं

किस को ख़बर थी काले बादल बिन बरसे रह जाते हैं
सावन आया लेकिन अपनी क़िस्मत में बरसात नहीं

मेरे गम़गीं होने पर अहबाब हैं यों हैरान ‘क़तील’
जैसे मैं पत्थर हूं मेरे सीने में जज़्बात नहीं

(ग़म़गीं = दुखी, उदास), (अहबाब = दोस्त, मित्र)

-क़तील शिफाई



इसी ग़ज़ल के कुछ और अश'आर:

ग़म के अन्धियारे में तुझको अपना साथी क्यूँ समझूँ 
तू फिर तू है, मेरा तो साया भी मेरे साथ नहीं 

माना जीवन में औरत एक बार मोहब्बत करती है,
लेकिन मुझको ये तो बता दे क्या तू औरत ज़ात नहीं

ख़त्म हुआ मेरा अफ़साना अब ये आंसू पोंछ भी लो
जिस में कोई तारा चमके आज की रात वो रात नहीं



Tum poocho aur main na bataun aise to halaat nahin
Ek zara sa dil toota hai aur to koi bat nahin

Toot gayaa jab dil to phir ye saans ka nagmaa kya maani
Goonj rahi hai kyon shahnaai jab koi baraat nahi

Kis ko khabar thi sanwale badal bin barse ud jate hain
Sawan aya lekin apni qismat mein barsat nahin

Mere gam-geen hone par ahbab hain yon hairan 'Qateel'
Jaise main patthar hoon mere seene mein jazbat nahin

-Qateel Shifai

Ae husn-e-laalaafam zara aankh to mila/ ऐ हुस्न-ए-लालाफ़ाम ज़रा आँख तो मिला

ऐ हुस्न-ए-लालाफ़ाम ज़रा आँख तो मिला
ख़ाली पड़े हैं जाम ज़रा आँख तो मिला

(लालाफ़ाम = लाल रंग का)

कहते हैं आँख आँख से मिलना है बंदगी
दुनिया के छोड़ काम ज़रा आँख तो मिला

ये जाम, ये सुबू, वो तसव्वुर की चांदनी
साक़ी कहाँ मदाम ज़रा आँख तो मिला

(सुबू = शराब रखने का पात्र, घड़ा), (तसव्वुर = ख़याल, विचार, याद), (मदाम = ?)

आ जायेगा यक़ीन ख़ुदा सबको यक-ब-यक
लेकर ख़ुदा का नाम ज़रा आँख तो मिला

(यक-ब-यक = अचानक, सहसा, अकस्मात्)

हैं राह-ए-कहकशाँ में अज़ल से खड़े हुए
'सागर' तेरे ग़ुलाम ज़रा आँख तो मिला

(राह-ए-कहकशाँ = आकाशगंगा की राह), (अज़ल = सृष्टि के आरम्भ, अनादिकाल)

-सागर सिद्दीक़ी


इसी ग़ज़ल के कुछ और अश'आर:

क्या वो न आज आयेंगे तारों के साथ साथ
तनहाइयों की शाम ज़रा आँख तो मिला

साक़ी मुझे भी चाहिये इक जाम-ए-आरज़ू
कितने लगेंगे दाम ज़रा आँख तो मिला








Ae husn-e-laalaafam zara aankh to mila
Khaali pade hain jaam zara aankh to mila

Kahte hain aankh aankh se milna hai bandagi
Duniya ke chhor kaam zara aankh to mila

Ye jaam, ye suboo, ye tasavvur ki chaandni
Saaqi kahaan madaam zara aankh to mila

Aa jayega yakeen-e-khuda sabko yak-ba-yak
Lekar khdua ka naam zara aankh to mila

Hai raah-e-kahkashaan mein azal se khade huye
'Sagar' tere ghulam zara aankh to mila

-Sagar Siddhiqi

Wednesday, 28 January 2015

Be-iraada nazar unse takra gayi/ बे-इरादा नज़र उनसे टकरा गई

बे-इरादा नज़र उनसे टकरा गई 
ज़िन्दगी में अचानक बहार आ गई 

रूख़ से पर्दा उठा चाँद शर्मा गया 
ज़ुल्फ़ बिखरी तो काली घटा छा गई 

वो जो हँसते हुए बज़्म में आ गए                           (बज़्म = महफ़िल, सभा)
मैं ये समझा क़यामत क़रीब आ गई

उनकी ज़ुल्फ़ों में पड़ते हुए ख़म देखकर 
शेख़ जी की तबीयत भी ललचा गई

मौत क्या चीज़ है मैं तुझको समझाऊँ क्या 
इक मुसाफ़िर था रस्ते में नींद आ गई

दिल में पहले सी ऐ 'दिल' वो धड़कन नहीं 
मोहब्बत में शायद कमी आ गई

-दिल लखनवी 








Be-iraada nazar unse takra gayi
Zindagi mein achaanak bahaar aa gayi

Rukh se parda utha chaand sharma gaya
Zulf bikhri to kaali ghata chaa gayee

Wo jo hanste hue bazm mein aa gaye
Main ye samjhe qayaamat kareeb aa gayi

Unki zulfon mein padte hue kham dekh kar
Sheikh ji ki tabiyat bhi lalcha gayi

Maut kya cheez hai main tujhko samjhaaun kya
Ik musafir tha raste mein neend aa gayi

Dil mein pahli si ae 'Dil' wo dhadkan nahi
Mohabbat mein shayad kami aa gayi

-Dil Lakhnawi

Tuesday, 27 January 2015

Ya rab gham-e-hijran mein itna to kiya hota/ या रब ग़म-ए-हिज्राँ में इतना तो किया होता

या रब ग़म-ए-हिज्राँ में इतना तो किया होता
जो हाथ जिगर पर है वो दस्त-ए-दुआ होता

(ग़म-ए-हिज्राँ = जुदाई के दुःख), (दस्त-ए-दुआ = दुआ मांगने के लिए उठा हाथ)

इक इश्क़ का ग़म आफ़त और उस पे ये दिल आफ़त
या ग़म न दिया होता या दिल न दिया होता 

नाकाम तमन्ना दिल इस सोच में रहता है
यूँ होता तो क्या होता यूँ होता तो क्या होता

उम्मीद तो बँध जाती तस्कीन तो हो जाती
वादा न वफ़ा करते वादा तो किया होता

(तस्कीन = चैन, आराम)

ग़ैरों से कहा तुम ने ग़ैरों से सुना तुम ने
कुछ हम से कहा होता कुछ हम से सुना होता

-चराग़ हसन हसरत



Ya rab gham-e-hijran mein itna to kiya hota
Jo haath jigar par hai wo dast-e-dua hota

Ik ishq ka gham aafat aur us pe ye dil aafat
Ya gham na diya hota ya dil na diya hota

Nakam tamanna dil is soch mein rehta hai
Yoon hota to kya hota yoon hota to kya hota

Ummeed to bandh jati taskin to ho jati
Waada na wafaa karte waada to kiya hota

Gairon se kaha tum ne gairon se suna tum ne
Kuch hum se kaha hota kuch hum se suna hota

-Chirag Hasan Hasrat

Jaach mainu aa gayi gham khaan di





-Shiv Kumar Batalvi/ शिव कुमार बटालवी

Jinhein main dhoondhta tha aasmanon mein zameenon mein/ जिन्हें मैं ढूँढता था आसमानों में ज़मीनों में

जिन्हें मैं ढूँढता था आसमानों में ज़मीनों में
वो निकले मेरे ज़ुल्मतख़ाना-ए-दिल के मकीनों में

(ज़ुल्मतख़ाना-ए-दिल = दिल के अँधेरे घर), (मकान में रहने वाले)

महीने वस्ल के घड़ियों की सूरत उड़ते जाते हैं
मगर घड़ियाँ जुदाई की गुज़रती हैं महीनों में

(वस्ल = मिलन)

मुझे रोकेगा तू ऐ नाख़ुदा क्या ग़र्क़ होने से
कि जिन को डूबना है डूब जाते हैं सफ़ीनों में

(नाख़ुदा = मल्लाह, नाविक), (ग़र्क़ = डूबने), (सफ़ीनों = जहाज़ों, नावों)

मोहब्बत के लिये दिल ढूँढ कोई टूटने वाला
ये वो मय है जिसे रखते हैं नाज़ुक आबगीनों में

(आबगीनों =  बारीक़ परत वाली काँच की बोतलें)

ख़मोश ऐ दिल भरी महफिल में चिल्लाना नहीं अच्छा
अदब पहला क़रीना है मुहब्बत के क़रीनों में

(क़रीना = शिष्टता, तमीज़, सलीका)

बुरा समझूँ उन्हें मुझ से तो ऐसा हो नहीं सकता
कि मैं ख़ुद भी तो हूँ 'इक़बाल' अपने नुक्ताचीनों में


(नुक्ताचीनों = आलोचकों)

- अल्लामा इक़बाल




इसी कुछ और अश'आर:

अगर कुछ आशना होता मज़ाक़-ए- जिबहसाई से
तो संग-ए-आस्तान-ए-काबा जा मिलता जबीनों से

(आशना = परिचित), (मज़ाक़-ए- जिबहसाई = माथा टेकने का आनन्द), (संग-ए-आस्तान-ए-काबा = काबा की दहलीज़ का पत्थर जिसपर हर यात्री माथा टेकता है), (जबीनों = माथों)

कभी अपना भी नज़्ज़ारा किया है तूने ऐ मजनूँ
कि लैला की तरह तू भी तो है महमिलनशीनों में

(महमिलनशीनों = ऊँट की पीठ पर पर्देदार हौदे में बैठने वाली)

जला सकती है शम्म -ए-कुश्ता को मौज-ए-नफ़स उन की
इलाही क्या छुपा होता है अहल-ए-दिल के सीनों में

(शम्म -ए-कुश्ता = बुझी हुई शम्मा को), (मौज-ए-नफ़स = आह भरी साँस, उच्छ्वास), (अहल-ए-दिल = दिल वालों)

तमन्ना दर्द-ए-दिल की हो तो कर ख़िदमत फ़क़ीरों की
नहीं मिलता ये गौहर बादशाहों के ख़ज़ीनों में

(ख़िदमत = सेवा), (गौहर = मोती), (ख़ज़ीनों =  कोशों)

न पूछ इन ख़िर्क़ापोशों की इरादत हो तो देख उनको
यद-ए-बैज़ा लिए बैठे हैं ज़ालिम आस्तीनों में

(ख़िर्क़ापोशों = चीथड़े पहने हुए लोगों), (इरादत  = श्रद्धा, आस्था, विश्वास), (यद-ए-बैज़ा = चमकता हुआ हाथ)

नुमायाँ हो के दिखला दे कभी इनको जमाल अपना
बहुत मुद्दत से चर्चे हैं तेरे बारीक बीनों के

(नुमायाँ = ज़ाहिर, प्रकट),  (जमाल = सौन्दर्य, शोभा), (बारीक बीनों = बुद्धिमानों)

किसी ऐसे शरर से फूँक अपने ख़िरमन-ए-दिल को
कि ख़ुर्शीद-ए-क़यामत भी हो तेरे ख़ोश:चीनों में

(शरर = चिंगारी), (ख़िरमन-ए-दिल = दिल का खलिहान), (ख़ुर्शीद-ए-क़यामत = क़यामत का सूर्य), (ख़ोश:चीनों = लाभ उठाने वालों, प्रशंसकों)



Jinhein main dhoondhta tha aasmanon mein zameenon mein
Wo nikle mere zulmatKhaana-e-dil ke makeenon mein

Maheene vasl ke ghadhiyon ki soorat udte jaate hain
Magar ghadiyaan judaai ki guzarti hain maheenon mein

Mujhe rokega tu ae naaKhuda kya gharq hone se
Ki jinko doobna hai doob jaate hain safeenon mein

Mohabbat ke liye dil dhoondh koi tootne waala
Ye wo mai hai jise rakhte hain naazuk aabgeenon mein

Khamosh ae dil bhari mehfil mein chillana nahi achcha
Adab pahla kareena hai muhabbat ke kareeno mein

Bura samjhoon unhen mujh se to aisa ho nahi sakta
Ki main khud bhi to hoon 'Iqbaal' apne nuktacheeno mein

-Allama Iqbal

Khuda se maango milega/ ख़ुदा से माँगो मिलेगा

ख़ुदा से माँगो मिलेगा
उसका वादा है वो देगा
उसके वादे पे ऐतबार करो
ख़ुदा से प्यार करो प्यार करो प्यार करो

वही तो राह है सच है
वही तो जीवन है
और उसने रूह जो भेजी है साथ हरदम है
वो सदा साथ चलेगा उसका वादा है चलेगा
उसके वादे पे ऐतबार करो

पहले उसकी बादशाहत उसकी राह चुनो
तुमको दुनिया की हर इक चीज़ भी वो देगा सुनो
वो जो कहता है करेगा उसका वादा है करेगा
उसके वादे पे ऐतबार करो

https://www.youtube.com/watch?v=Xzqg6Ah5Tls

Khuda se maango milega
Uska waada hai wo dega
Uske waade pe aitebaar karo
Kuda se pyaar karo pyaar karo pyaar karo

Wahi to raah hai sach hai
Wahi to jeevan hai
Aur usne rooh jo bheji hai, saath hardum hai
Wo sadaa saath chalega, uska waaada hai chalega
Uske waade pe aitebaar karo

Pehle uski baadshaahat uski raah chuno
Tumko duniya ki har ik cheez bhi wo degaa suno
Wo jo kehta hai karega uska waada hai karega
Uske waade pe aitebaar karo

Ibtida mein kalaam tha/ इब्तिदा में कलाम था

इब्तिदा में कलाम था
और वो ख़ुदा के साथ था
वो कलाम ख़ुद ख़ुदा ही था
पहले से उसके साथ था

(इब्तिदा = आरम्भ, प्रारम्भ), (कलाम = शब्द, वाणी, बोली)

उसमें ही सब कुछ पैदा हुआ
उसके बिना तो कुछ भी न था

थी उस कलाम से ही ज़िन्दगी
थी वो ही इन्सां की रौशनी

वो नूर चमका अँधेरों में
अँधेरा उसको समझा न था

-अनिल कांत



Ibtida mein kalaam tha
Aur wo khuda ke saath tha
Wo kalaam khud khuda hi tha
Pehle se uske saath tha

Usme hi sab kuch paida hua
Uske bina to kuch bhi na tha

Thee us kalaam se hi zindagi
Thee wo hi insaan ki roshni

Wo noor chamka, andheron mein
Andhera usko samjha na tha

-Anil Kant 

Meri rooh khuda mein magan hai/ मेरी रूह ख़ुदा में मगन है

मेरी रूह ख़ुदा में मगन है
जान मेरी नजात से खुश है
मेरे सर को उसने बुलन्द किया
अब कौन मेरा है उसके सिवा

देखो ग़ुरूर से बचके रहना
मुँह से बड़ा कोई बोल न कहना
वो है सब कुछ तोलने वाला
हर परदे को खोलने वाला
वो ख़ुदा ख़ुदा-ए-रहीम है

हिम्मत मेरी टूट गई थी
क़िस्मत मुझसे रूठ गई थी
उसने अपने पास बुलाया
मुझको अपने साथ बिठाया
मेरी जान पे उसका करम है



Meri rooh khuda mein magan hai
Jaan meri najaat se Khush hai
Mere sar ko usne buland kiya
Ab kaun mera hai uske siva

Dekho guroor se bachh ke rehna
Munh se bada koi bol na kehna
Wo hai sub kuch tolne waala
Har parde ko kholne waala
Wo Khuda, Khuda-e-Raheem hai

Himmat meri toot gayi thi
Kismat mujhse rooth gayi thi
Usne apne paas bulaaya
Mujhko apne saath bithaya
Meri jaan pe uska karam hai

Raatein thi suni suni din bhi udas mere/ रातें थीं सूनी सूनी दिन भी उदास मेरे

रातें थीं सूनी सूनी दिन भी उदास मेरे
तुम मिल गए तो जागे सोये हुए सवेरे

ख़ामोश इन लबों को इक रागिनी मिली है
मुरझाये से गुलों को इक ताज़गी मिली है
घेरे हुए थे मुझ को कब से घने अंधेरे

रूठा हुआ था मुझसे, ख़ुशियों का हर तराना
लगता था जिंदगानी, बन जायेगी फ़साना
हरसू लगे हुए थे तन्हाइयों के फेरे


Raatein thi suni suni din bhi udas mere
Tum mil gaye to jaage soye hue sawere

Khamosh in labo ko ik ragini mili hai
Murjhaye se gulon ko ik taazgi mili hai
Ghere hue the mujh ko kabse ghane andhere

Rootha hua tha mujhse khushiyo ka har tarana
Lagta tha zindagani ban jayegi fasana
Harsu lage hue the tanhaiyon ke phere

Ankhiyan nu ren de ankhiya de kol kol\ अँखियाँ नु रेण दे अँखियाँ दे कोल कोल



Dhundhla dhundhla rasta tera\ धुँधला धुँधला रस्ता तेरा

धुँधला धुँधला रस्ता तेरा
इसमें मन की कुछ धूप मिला

मन जोगी है ले इकतारा
कुछ गा कुछ गा
कल्याण यही होगा निर्वाण यही होगा

इक सपना है जो रस्ता है
गंगा तट पर मन प्यासा है
आगे पीछे मृगतृष्णा है
रुक जा रुक जा



Dhundhla dhundhla rasta tera
Is mein man ki kuch dhup mila

Man jogi hai le iktara kuch gaa kuch gaa
Kalyan yahi hoga nirvan yahi hoga

Ik sapna hai jo rasta hai
Ganga tat par man pyaasa hai
Aage peeche mrigtrishna hai
ruk ja ruk ja

Live In Brussels 2011

Maikashi ka to maza is bhari barsaat mein hai/ मयकशी का तो मज़ा इस भरी बरसात में है

मयकशी का तो मज़ा इस भरी बरसात में है
और बरसात में भी दिन में नहीं रात में है

किसको कहते हैं मोहब्बत मुझे मालूम नहीं
एक तूफ़ान सा लेकिन मेरे जज़्बात में है

कह दिया उसको जो बेमिस्ल तो क्या है ऐ शेख
कम वो इस बात में उस बात में किस बात में है

(बेमिस्ल = बेमिसाल, अनुपम, अतुल्य, लाजवाब)

ऐतबार आपकी किस बात का इंसान करे
कुछ न कुछ बात निहाँ आपकी हर बात में है

(निहाँ = छुपी हुई)

देखिये होती है कब मेरी गुज़ारिश मंज़ूर
अब तो ये बात सवालात-ओ-जवाबात में है

-दाग़ देहलवी

https://www.youtube.com/watch?v=wb8iWfsGVrE




Maikashi ka to maza is bhari barsaat mein hai
Aur barsaat mein bhi din mein nahi raat mein hai

Kisko kehte hain mohabbat mujhe maaloom nahi
Ek toofaan sa lekin mere jazbaat mein hai

Keh diya usko jo bemisl to kya hai aye sheikh
Kam wo is baat mein, us baat mein, kis baat mein hai

Aitbaar aapki kis baat ka insaan kare
Kuch na kuch baat nihaan aapki har baat mein hai.

Dekhiye hoti hai kab meri guzaarish manzoor
Ab to ye baat sawaalaat-o-jawaabaat mein hai

-Daag Dehalvi

Jokes in concerts

Haye O rabba nahin lagda dil mera

Meri zuban se meri dastan suno to sahi/ मेरी ज़ुबाँ से मेरी दास्ताँ सुनो तो सही

मेरी ज़ुबाँ से मेरी दास्ताँ सुनो तो सही
यक़ीं करो न करो मेहरबाँ सुनो तो सही

चलो ये मान लिया मुजरिम-ए -मोहब्बत हैं
हमारे जुर्म का हमसे बयाँ सुनो तो सही

ख़िज़ां-नसीब तमन्ना सवाल करती है
जवाब दो न दो, मेहरबाँ सुनो तो सही

कहोगे वक़्त को मुजरिम भरी बहारों में
जला था कैसे मेरा आशियाँ सुनो तो सही

बनोगे दोस्त मेरे तुम भी दुश्मनों इक दिन
मेरी हयात की आह-ओ-फ़ुग़ाँ सुनो तो सही

(हयात = जीवन), (आह-ओ-फ़ुग़ाँ = विलाप, आर्तनाद, दुहाई)

लबों को सी के जो बैठे हैं बज़्म-ए-दुनिया में
कभी तो उनकी भी ख़ामोशियाँ सुनो तो सही

-सुदर्शन फ़ाकिर


Jagjit Singh/ जगजीत सिंह 



Chitra Singh/ चित्रा सिंह 



Sudha Malhotra/ सुधा मल्होत्रा 




Meri zuban se meri dastan suno to sahi
Yakin karo na karo meharbaan suno to sahi

Chalo ye maan liya mujrim-e-mohabbat hain
Humare jurm ka humse bayaan suno to sahi

Khizaan-naseeb tamanna sawaal karti hai
Jawaab do na do meharbaan suno to sahi

Kahoge waqt ko mujrim bhari bahaaron mein
Jalaa tha kaise mera aashiyaan suno to sahi

Banoge dost mere tum bhi dushmanon ek din
Meri hayaat ki aah-o-fugaan suno to sahi

Labon ko see ke jo baithe hain bazm-e-duniya mein
Kabhi to unki bhi khamoshiyaan sunao to sahi

-Sudarshan Faakir